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ramayan 6.67.114-115: लक्ष्मण की यह बात सुनकर महाबली राक्षस कुम्भकर्ण ने उनका आदर न करते हुए सुमित्रापुत्र पर झपट्टा मारकर श्रीराम पर आक्रमण कर दिया। उस समय वह अपने पैरों की ध्वनि से पृथ्वी को कम्पित कर रहा था।   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 114-115
 
 
श्लोक  6.67.114-115 
इति श्रुत्वा ह्यनादृत्य लक्ष्मणं स निशाचर:॥ ११४॥
अतिक्रम्य च सौमित्रिं कुम्भकर्णो महाबल:।
राममेवाभिदुद्राव कम्पयन्निव मेदिनीम्॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण की यह बात सुनकर महाबली राक्षस कुम्भकर्ण ने उनका आदर न करते हुए सुमित्रापुत्र पर झपट्टा मारकर श्रीराम पर आक्रमण कर दिया। उस समय वह अपने पैरों की ध्वनि से पृथ्वी को कम्पित कर रहा था।
 
Hearing this from Lakshman, without respecting him, the mighty demon Kumbhakarna jumped over Sumitra's son and attacked Shri Ram. At that time, he was making the earth tremble with the sound of his feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)