Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.67.113-114h: वीर कुम्भकर्ण! महापराक्रम प्राप्त करके तुम इन्द्र आदि देवताओं के लिए भी असह्य हो गए हो। तुमने जो कहा है, वह सर्वथा सत्य है, मिथ्या नहीं। मैंने आज अपनी आँखों से तुम्हारा पराक्रम देखा है। यहाँ दशरथपुत्र भगवान राम हैं, जो पर्वत के समान अविचल खड़े हैं।॥113 1/2॥ | ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वीर कुम्भकर्ण! महापराक्रम प्राप्त करके तुम इन्द्र आदि देवताओं के लिए भी असह्य हो गए हो। तुमने जो कहा है, वह सर्वथा सत्य है, मिथ्या नहीं। मैंने आज अपनी आँखों से तुम्हारा पराक्रम देखा है। यहाँ दशरथपुत्र भगवान राम हैं, जो पर्वत के समान अविचल खड़े हैं।॥113 1/2॥
Valiant Kumbhakarna! You have become unbearable even for Indra and other gods after attaining great valour. What you have said is absolutely correct and not a lie. I have seen your valour with my own eyes today. Here is Lord Rama, the son of Dasharatha, who is standing as still as a mountain.'॥ 113 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥