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ramayan 6.67.108: ऐरावत पर सवार और सम्पूर्ण देवताओं से घिरा हुआ शक्तिशाली इन्द्र भी युद्ध में मेरे सामने टिक नहीं सका है॥108॥   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  6.67.108 
ऐरावतं समारूढो वृत: सर्वामरै: प्रभु:।
नैव शक्रोऽपि समरे स्थितपूर्व: कदाचन॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
ऐरावत पर सवार और सम्पूर्ण देवताओं से घिरा हुआ शक्तिशाली इन्द्र भी युद्ध में मेरे सामने टिक नहीं सका है॥108॥
 
Even the powerful Indra riding on Airavat and surrounded by all the gods has not been able to stand before me in battle.॥ 108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)