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ramayan 6.67.104: लक्ष्मण के स्वर्णिम बाणों से आवृत होकर काले कोयले के समान कान्ति वाला कुम्भकर्ण बादलों से आवृत होकर सूर्य के समान शोभा पा रहा था।   |   ramayan सर्ग 6.67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 67: कम्भकर्ण का भयंकर युद्ध और श्रीराम के हाथ से उसका वध  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  6.67.104 
नीलाञ्जनचयप्रख्य: शरै: काञ्चनभूषणै:।
आपीडॺमान: शुशुभे मेघै: सूर्य इवांशुमान्॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के स्वर्णिम बाणों से आवृत होकर काले कोयले के समान कान्ति वाला कुम्भकर्ण बादलों से आवृत होकर सूर्य के समान शोभा पा रहा था।
 
Kumbhakarana, who had the radiance of a heap of black coal, being covered with the golden arrows of Lakshman, was looking as beautiful as the Sun with rays covered by the clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)