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ramayan 6.66.32: बुद्धिमान वालिपुत्र ने उन सबको प्रसन्न कर दिया। वे सब वानरपति सुग्रीव की आज्ञा की प्रतीक्षा में खड़े रहे ॥32॥   |   ramayan सर्ग 6.66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.66.32 
प्रहर्षमुपनीताश्च वालिपुत्रेण धीमता।
आज्ञाप्रतीक्षास्तस्थुश्च सर्वे वानरयूथपा:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान वालिपुत्र ने उन सबको प्रसन्न कर दिया। वे सब वानरपति सुग्रीव की आज्ञा की प्रतीक्षा में खड़े रहे ॥32॥
 
The intelligent son of Vali pleased them all. All of them stood waiting for the orders of Vanaruthapati Sugriva. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)