Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.66.3: इन्द्र, यम या वरुण के लिए भी उसे मारना असम्भव था। उस भयानक नेत्रों वाले रात्रि-राक्षस को आते देख सभी वानर भाग खड़े हुए।   |   ramayan सर्ग 6.66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.66.3 
तमवध्यं मघवता यमेन वरुणेन वा।
प्रेक्ष्य भीमाक्षमायान्तं वानरा विप्रदुद्रुवु:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र, यम या वरुण के लिए भी उसे मारना असम्भव था। उस भयानक नेत्रों वाले रात्रि-राक्षस को आते देख सभी वानर भाग खड़े हुए।
 
It was impossible for Indra, Yama or Varuna to kill him. Seeing that night-demon with terrifying eyes approaching, all the monkeys ran away. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)