श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.66.29 
कृतं न: कदनं घोरं कुम्भकर्णेन रक्षसा।
न स्थानकालो गच्छामो दयितं जीवितं हि न:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वे बोले, 'कुम्भकर्ण राक्षस ने हम लोगों में बड़ा भारी संहार मचाया है; इसलिए अब यहाँ रुकने का समय नहीं है। हम जा रहे हैं; क्योंकि हमें अपने प्राण प्रिय हैं॥ 29॥
 
They said, 'The demon Kumbhakarna has caused great destruction among us; therefore this is not the time to stay. We are leaving; because we love our lives.'॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)