Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.66.27: यदि हम प्रसिद्ध योद्धा होकर भी प्राण बचाने के लिए भागें और संख्या में अधिक होने पर भी एक भी योद्धा का सामना न कर सकें, तो हमारा यश नष्ट हो जाएगा। ॥27॥   |   ramayan सर्ग 6.66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.66.27 
पलायनेन चोद्दिष्टा: प्राणान् रक्षामहे वयम्।
एकेन बहवो भग्ना यशो नाशं गमिष्यति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यदि हम प्रसिद्ध योद्धा होकर भी प्राण बचाने के लिए भागें और संख्या में अधिक होने पर भी एक भी योद्धा का सामना न कर सकें, तो हमारा यश नष्ट हो जाएगा। ॥27॥
 
"If, despite being renowned warriors, we run away to save our lives and despite being large in number are unable to confront a single warrior, our glory will be ruined." ॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)