श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.66.23 
भीरो: प्रवादा: श्रूयन्ते यस्तु जीवति धिक्कृत:।
मार्ग: सत्पुरुषैर्जुष्ट: सेव्यतां त्यज्यतां भयम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो सज्जनों द्वारा डाँट खाने पर भी जीवित रहता है, उसके जीवन को धिक्कार है। कायरों को सदैव ऐसी निन्दापूर्ण बातें सुननी पड़ती हैं। इसलिए तुम सब लोग भय छोड़कर सज्जनों द्वारा परोसे गए मार्ग की शरण लो॥ 23॥
 
Shame on the life of one who continues to live despite being rebuked by the virtuous. Cowards always have to listen to such slanderous words. Therefore, you all should leave fear and take refuge in the path served by the virtuous.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)