श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.66.21 
कुलेषु जाता: सर्वेऽस्मिन् विस्तीर्णेषु महत्सु च।
क्व गच्छत भयत्रस्ता: प्राकृता हरयो यथा।
अनार्या: खलु यद्भीतास्त्यक्त्वा वीर्यं प्रधावत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तुम सब लोग महान् तथा दूर-दराज कुल में उत्पन्न हुए हो। फिर तुम साधारण वानरों की भाँति भयभीत होकर कहाँ भाग रहे हो? यदि तुम अपना पराक्रम त्यागकर भयभीत होकर भाग जाओगे, तो निश्चय ही तुम अनार्य माने जाओगे॥ 21॥
 
‘You all are born in a great and far-flung family. Then where are you running away in fear like ordinary monkeys? If you abandon your prowess and run away out of fear, then you will certainly be considered non-Aryan.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)