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श्लोक  6.66.2 
ननाद च महानादं समुद्रमभिनादयन्।
विजयन्निव निर्घातान् विधमन्निव पर्वतान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
बाहर आकर उसने ऊँची आवाज़ में गहरी आवाज़ निकाली, मानो पहाड़ हिल रहे हों और समुद्र गूँज रहा हो। उसकी दहाड़ बिजली की गड़गड़ाहट को भी मात दे रही थी।
 
Coming out, he started making a deep sound in a loud voice, as if shaking the mountains and echoing the sea. His roar was even overpowering the thunder of lightning.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)