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ramayan 6.66.17: बहुत से वानर और भालू समुद्र में डूब गए। बहुत से पर्वतों की गुफाओं में शरण लेने लगे। कुछ गिर पड़े, कुछ एक स्थान पर खड़े न रह सके, इसलिए भाग गए। कुछ गिर पड़े और कुछ शवों की भाँति साँस रोककर लेट गए॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.66.17 
ममज्जुरर्णवे केचिद् गुहा: केचित् समाश्रिता:।
निपेतु: केचिदपरे केचिन्नैवावतस्थिरे।
केचिद् भूमौ निपतिता: केचित् सुप्ता मृता इव॥ १७॥
 
 
अनुवाद
बहुत से वानर और भालू समुद्र में डूब गए। बहुत से पर्वतों की गुफाओं में शरण लेने लगे। कुछ गिर पड़े, कुछ एक स्थान पर खड़े न रह सके, इसलिए भाग गए। कुछ गिर पड़े और कुछ शवों की भाँति साँस रोककर लेट गए॥17॥
 
Many monkeys and bears drowned in the sea. Many took refuge in the caves of the mountains. Some fell, some could not stand in one place, so they ran. Some collapsed and some lay down holding their breath like dead bodies.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)