श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.66.14 
लङ्घयन्त: प्रधावन्तो वानरा नावलोकयन्।
केचित् समुद्रे पतिता: केचिद् गगनमास्थिता:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वानर बहुत तेजी से दौड़ने लगे, ऊँची-नीची भूमि को पार करते हुए। उन्होंने आगे-पीछे या इधर-उधर कहीं भी नहीं देखा। कुछ समुद्र में गिर पड़े और कुछ आकाश में उड़ते रहे॥14॥
 
The monkeys started running very fast, crossing the high and low lands. They did not look anywhere in front or behind or around. Some fell into the ocean and some kept flying in the sky.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)