श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.66.13 
लोहितार्द्रास्तु बहव: शेरते वानरर्षभा:।
निरस्ता: पतिता भूमौ ताम्रपुष्पा इव द्रुमा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
बहुत से बड़े-बड़े वानर रक्त से लथपथ होकर भूमि पर पड़े थे, जिन्हें उसने उठाकर पटक दिया, वे लाल फूलों से लदे वृक्षों के समान भूमि पर गिर पड़े॥13॥
 
Many great monkeys lay soaked in blood on the ground. Those whom he picked up and threw up, fell on the ground like trees laden with red flowers.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)