Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.66.1: महाबली कुम्भकर्ण पर्वत शिखर के समान लम्बा और विशाल था। वह प्राचीर को लांघकर शीघ्र ही नगर से बाहर निकल गया॥1॥   |   ramayan सर्ग 6.66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 66: कुम्भकर्ण के भय से भागे हुए वानरों का अङ्गद द्वारा प्रोत्साहन और आवाहन, कुम्भकर्ण द्वारा वानरों का संहार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.66.1 
स लङ्घयित्वा प्राकारं गिरिकूटोपमो महान्।
निर्ययौ नगरात् तूर्णं कुम्भकर्णो महाबल:॥ १॥
 
 
अनुवाद
महाबली कुम्भकर्ण पर्वत शिखर के समान लम्बा और विशाल था। वह प्राचीर को लांघकर शीघ्र ही नगर से बाहर निकल गया॥1॥
 
The mighty Kumbhakarana was as tall and huge as a mountain peak. He jumped over the ramparts and came out of the city very quickly.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)