Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.65.56: आकाश में मेघों की गर्जना के समान उस राक्षस की भयंकर गर्जना सुनकर बहुत से वानर जड़ से कटे हुए साल वृक्षों के समान पृथ्वी पर गिर पड़े ॥56॥   |   ramayan सर्ग 6.65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  6.65.56 
ते तस्य घोरं निनदं निशम्य
यथा निनादं दिवि वारिदस्य।
पेतुर्धरण्यां बहव: प्लवङ्गा
निकृत्तमूला इव शालवृक्षा:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
आकाश में मेघों की गर्जना के समान उस राक्षस की भयंकर गर्जना सुनकर बहुत से वानर जड़ से कटे हुए साल वृक्षों के समान पृथ्वी पर गिर पड़े ॥56॥
 
Hearing the fierce roar of that demon, which was like the roar of clouds in the sky, many monkeys fell on the earth like sal trees cut from their roots. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)