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श्लोक  6.65.53 
स लङ्घयित्वा प्राकारं पद‍्भ्यां पर्वतसंनिभ:।
ददर्शाभ्रघनप्रख्यं वानरानीकमद्भुतम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
वह पर्वत के समान ऊँचा था। उसने लंका की सीमा-दीवार को दोनों पैरों से पार किया और देखा कि वानरों की अद्भुत सेना घने बादलों के समान फैल रही है। 53.
 
He was as tall as a mountain. He crossed the boundary wall of Lanka with both legs and saw that the wonderful army of monkeys was spreading like dense clouds. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)