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श्लोक  6.65.52 
अचिन्तयन् महोत्पातानुदितान् रोमहर्षणान्।
निर्ययौ कुम्भकर्णस्तु कृतान्तबलचोदित:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अनेक रोंगटे खड़े कर देने वाली विपत्तियाँ उत्पन्न हुईं; किन्तु उन पर ध्यान न देकर, काल की शक्ति से प्रेरित होकर, कुम्भकर्ण युद्ध के लिए निकल पड़ा।
 
In this manner, many hair-raising calamities arose; but paying no heed to them Kumbhakarna, inspired by the power of Time, set out for the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)