श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.65.42 
संनिपत्य च रक्षांसि दग्धशैलोपमो महान्।
कुम्भकर्णो महावक्त्र: प्रहसन्निदमब्रवीत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
पहले उसने युद्ध के लिए दैत्यों की सेना बनाई, फिर दावानल में जले हुए पर्वत के समान विशाल कुम्भकर्ण ने अपना विशाल मुख खोलकर जोर से हँसकर इस प्रकार कहा -॥42॥
 
First he formed the army of demons in battle formation. Then Kumbhakarana, who was as huge as a mountain burnt in a forest fire, opened his huge mouth and laughed loudly and said thus -॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)