श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.65.40 
अथान्यद्वपुरादाय दारुणं घोरदर्शनम्।
निष्पपात महातेजा: कुम्भकर्णो महाबल:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली कुम्भकर्ण ने भयंकर भयंकर रूप धारण किया और युद्ध के लिए प्रस्थान किया।
 
Thereafter the mighty Kumbhakarna assumed a fierce form, which was frightening to look at. Having assumed such a form he set out for the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)