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ramayan 6.65.19: उसकी प्रभा इन्द्र के बाणों के समान थी। वह वज्र के समान भारी था और देवताओं, दानवों, गन्धर्वों, यक्षों और सर्पों को नष्ट करने में समर्थ था।॥19॥   |   ramayan सर्ग 6.65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.19 
इन्द्राशनिसमप्रख्यं वज्रप्रतिमगौरवम्।
देवदानवगन्धर्वयक्षपन्नगसूदनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उसकी प्रभा इन्द्र के बाणों के समान थी। वह वज्र के समान भारी था और देवताओं, दानवों, गन्धर्वों, यक्षों और सर्पों को नष्ट करने में समर्थ था।॥19॥
 
His radiance was like that of Indra's arrows. He was as heavy as a thunderbolt and was capable of destroying gods, demons, Gandharvas, Yakshas and serpents.॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)