श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.65.18 
आददे निशितं शूलं वेगाच्छत्रुनिबर्हण:।
सर्वं कालायसं दीप्तं तप्तकाञ्चनभूषणम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का संहार करने वाले उस वीर ने बड़ी तेजी से अपने हाथ में वह तीक्ष्ण भाला उठा लिया, जो पूर्णतः काले लोहे का बना हुआ था, चमकीला था और तपाये हुए सोने से अलंकृत था।
 
That heroic slayer of enemies took up with great speed the sharp spear in his hand, which was made entirely of black iron, shining and adorned with heated gold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)