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श्लोक  6.65.17 
इत्येवमुक्त: संहृष्टो निर्जगाम महाबल:।
राज्ञस्तु वचनं श्रुत्वा योद्धुमुद्युक्तवांस्तदा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
रावण की यह बात सुनकर महाबली कुंभकर्ण अत्यंत प्रसन्न हुआ और रावण की बात सुनकर तुरंत युद्ध के लिए तैयार होकर लंकापुरी से चला गया।
 
On hearing this from Ravana, the mighty Kumbhakarna became very happy. On hearing Ravana's words, the king immediately got ready for war and left Lankapuri.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)