श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 65: कुम्भकर्ण की रणयात्रा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.65.14 
समालोक्य तु ते रूपं विद्रविष्यन्ति वानरा:।
रामलक्ष्मणयोश्चापि हृदये प्रस्फुटिष्यत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
आपके रूप को देखकर वानर भाग जाएँगे और राम-लक्ष्मण के हृदय छिद जाएँगे।॥14॥
 
The monkeys will run away upon seeing your form and the hearts of Rama and Lakshmana will be pierced.'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)