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ramayan 6.64.4: राक्षसों का प्रधान रावण समय और स्थान के अनुसार उचित कर्तव्य को जानता है तथा अपनी और शत्रु की स्थिति, वृद्धि और अवनति को भली-भाँति जानता है।॥4॥   |   ramayan सर्ग 6.64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.64.4 
स्थानं वृद्धिं च हानिं च देशकालविधानवित्।
आत्मनश्च परेषां च बुध्यते राक्षसर्षभ:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राक्षसों का प्रधान रावण समय और स्थान के अनुसार उचित कर्तव्य को जानता है तथा अपनी और शत्रु की स्थिति, वृद्धि और अवनति को भली-भाँति जानता है।॥4॥
 
Ravana, the chief of the demons, knows the right duty for the time and place and is well aware of his own and the enemy's position, growth and decline. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)