Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.64.35: मेरे विचार से यही सर्वोत्तम नीति है। युद्ध में श्रीराम के दर्शन मात्र से ही तुम्हारी मृत्यु हो सकती है; अतः तुम्हें युद्धभूमि में जाने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। तुम्हारी अभीष्ट इच्छा यहीं पूरी होगी। तुम्हें बिना युद्ध किए ही महान सुख का लाभ प्राप्त होगा। | ramayan सर्ग 6.64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतत् सुनीतं मम दर्शनेन
रामं हि दृष्ट्वैव भवेदनर्थ:।
इहैव ते सेत्स्यति मोत्सुको भू-
र्महानयुद्धेन सुखस्य लाभ:॥ ३५॥
अनुवाद
मेरे विचार से यही सर्वोत्तम नीति है। युद्ध में श्रीराम के दर्शन मात्र से ही तुम्हारी मृत्यु हो सकती है; अतः तुम्हें युद्धभूमि में जाने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। तुम्हारी अभीष्ट इच्छा यहीं पूरी होगी। तुम्हें बिना युद्ध किए ही महान सुख का लाभ प्राप्त होगा।
‘In my opinion, this is the best policy. In war, you may get disaster (death) just by seeing Shri Ram; therefore, you should not be eager to go to the battlefield, your desired wish will be fulfilled here. You will get the great benefit of happiness without fighting.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥