श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.64.32 
अनयोपधया राजन् भूय: शोकानुबन्धया।
अकामा त्वद्वशं सीता नष्टनाथा गमिष्यति॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इस छल से स्वयं को अनाथ समझने वाली सीता का दुःख बढ़ जाएगा और वह न चाहते हुए भी आपके शरण में आ जाएगी।' 32.
 
King! This deception will increase the grief of Sita, who considers herself an orphan, and she will surrender to you even though she does not want to.' 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)