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श्लोक  6.64.32 
अनयोपधया राजन् भूय: शोकानुबन्धया।
अकामा त्वद्वशं सीता नष्टनाथा गमिष्यति॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इस छल से स्वयं को अनाथ समझने वाली सीता का दुःख बढ़ जाएगा और वह न चाहते हुए भी आपके शरण में आ जाएगी।' 32.
 
King! This deception will increase the grief of Sita, who considers herself an orphan, and she will surrender to you even though she does not want to.' 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)