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ramayan 6.64.3: कुंभकर्ण! यह बात सच नहीं है कि हमारे राजा को नीति-अनीति का ज्ञान नहीं है। तुम बचपन के कारण ही ऐसी बातें धृष्टतापूर्वक कहना चाहते हो।   |   ramayan सर्ग 6.64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.64.3 
नहि राजा न जानीते कुम्भकर्ण नयानयौ।
त्वं तु कैशोरकाद् धृष्ट: केवलं वक्तुमिच्छसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कुंभकर्ण! यह बात सच नहीं है कि हमारे राजा को नीति-अनीति का ज्ञान नहीं है। तुम बचपन के कारण ही ऐसी बातें धृष्टतापूर्वक कहना चाहते हो।
 
Kumbhakarna! It is not true that our king does not know what is ethical and what is unethical. You want to say such things impudently only because of your childhood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)