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ramayan 6.64.2: कुम्भकर्ण! तुम कुलीन कुल में उत्पन्न हुए हो, परन्तु तुम्हारी दृष्टि (बुद्धि) नीच कुल के मनुष्यों के समान है। तुम हठी और अभिमानी हो, इसलिए तुम सब विषयों में कर्तव्य को नहीं जान सकते॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 6.64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.64.2 
कुम्भकर्ण कुले जातो धृष्ट: प्राकृतदर्शन:।
अवलिप्तो न शक्नोषि कृत्यं सर्वत्र वेदितुम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
कुम्भकर्ण! तुम कुलीन कुल में उत्पन्न हुए हो, परन्तु तुम्हारी दृष्टि (बुद्धि) नीच कुल के मनुष्यों के समान है। तुम हठी और अभिमानी हो, इसलिए तुम सब विषयों में कर्तव्य को नहीं जान सकते॥ 2॥
 
Kumbhakarna! You were born in a noble family, but your vision (intellect) is like that of a low-class person. You are stubborn and arrogant, so you cannot know what is the duty in all matters.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)