Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.64.17: कौन असहाय योद्धा ऐसे शत्रु को, जो सहायकों से संपन्न है और जो अपने प्राणों की बाजी लगाकर भी अपने शत्रुओं को मारने के लिए कृतसंकल्प है, इतना साधारण समझकर, परास्त करने की इच्छा कर सकता है? | ramayan सर्ग 6.64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हीनार्थस्तु समृद्धार्थं को रिपुं प्राकृतं यथा।
निश्चितं जीवितत्यागे वशमानेतुमिच्छति॥ १७॥
अनुवाद
कौन असहाय योद्धा ऐसे शत्रु को, जो सहायकों से संपन्न है और जो अपने प्राणों की बाजी लगाकर भी अपने शत्रुओं को मारने के लिए कृतसंकल्प है, इतना साधारण समझकर, परास्त करने की इच्छा कर सकता है?
Which helpless warrior can wish to subdue an enemy who is blessed with helpers and is determined to kill his enemies at the risk of his life, considering him to be so ordinary?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥