श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.64.1 
तदुक्तमतिकायस्य बलिनो बाहुशालिन:।
कुम्भकर्णस्य वचनं श्रुत्वोवाच महोदर:॥ १॥
 
 
अनुवाद
अपनी भुजाओं से सुशोभित विशाल एवं बलवान राक्षस कुम्भकर्ण के ये वचन सुनकर वह स्त्री बोली-॥1॥
 
Hearing these words of Kumbhakarna, the giant and powerful demon who was adorned with his arms, the lady said – ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)