vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 64: महोदर का कुम्भकर्ण के प्रति आक्षेप करके रावण को बिना युद्ध के ही अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति का उपाय बताना
»
श्लोक 1
श्लोक
6.64.1
तदुक्तमतिकायस्य बलिनो बाहुशालिन:।
कुम्भकर्णस्य वचनं श्रुत्वोवाच महोदर:॥ १॥
अनुवाद
अपनी भुजाओं से सुशोभित विशाल एवं बलवान राक्षस कुम्भकर्ण के ये वचन सुनकर वह स्त्री बोली-॥1॥
Hearing these words of Kumbhakarna, the giant and powerful demon who was adorned with his arms, the lady said – ॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×