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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 63: कुम्भकर्ण का रावण को उसके कुकृत्यों के लिये उपालम्भ देना और उसे धैर्य बँधाते हुए युद्धविषयक उत्साह प्रकट करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.63.41 
मां निहत्य किल त्वां हि निहनिष्यति राघव:।
नाहमात्मनि संतापं गच्छेयं राक्षसाधिप॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यराज! राम मुझे मारकर ही तुम्हारा वध कर सकते हैं; किन्तु मुझे अपने प्रति राम से कोई द्वेष या भय नहीं है।
 
O King of demons! Rama can kill you only after killing me first; but I do not feel any resentment or fear from Rama about myself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)