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ramayan 6.62.10-11h: इसके बाद कुम्भकर्ण एक सुन्दर दिव्य सिंहासन पर बैठ गया। उस आसन पर बैठकर महाबली कुम्भकर्ण ने क्रोध से लाल आँखें करके रावण से पूछा-॥10 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.62: कुम्भकर्ण का रावण के भवन में प्रवेश तथा रावण का राम से भय बताकर उसे शत्रुसेना के विनाश के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 62: कुम्भकर्ण का रावण के भवन में प्रवेश तथा रावण का राम से भय बताकर उसे शत्रुसेना के विनाश के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  6.62.10-11h 
कुम्भकर्ण: शुभं दिव्यं प्रतिपेदे वरासनम्।
स तदासनमाश्रित्य कुम्भकर्णो महाबल:॥ १०॥
संरक्तनयन: क्रोधाद् रावणं वाक्यमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
इसके बाद कुम्भकर्ण एक सुन्दर दिव्य सिंहासन पर बैठ गया। उस आसन पर बैठकर महाबली कुम्भकर्ण ने क्रोध से लाल आँखें करके रावण से पूछा-॥10 1/2॥
 
After this Kumbhakarna sat on a beautiful divine throne. Sitting on that seat, the mighty Kumbhakarna asked Ravana with his eyes turning red with anger -॥ 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)