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ramayan 6.61.8: जब अनजाने में ही महान कर्म करने वाले राजकुमार श्री राम ने यह पूछा, तब अत्यंत बुद्धिमान विभीषण ने ककुत्स्थ कुल के रत्न रघुनाथजी से इस प्रकार कहा -॥8॥   |   ramayan सर्ग 6.61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.61.8 
सम्पृष्टो राजपुत्रेण रामेणाक्लिष्टकर्मणा।
विभीषणो महाप्राज्ञ: काकुत्स्थमिदमब्रवीत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब अनजाने में ही महान कर्म करने वाले राजकुमार श्री राम ने यह पूछा, तब अत्यंत बुद्धिमान विभीषण ने ककुत्स्थ कुल के रत्न रघुनाथजी से इस प्रकार कहा -॥8॥
 
When Prince Shri Ram, who unintentionally performs great deeds, asked this, then the extremely intelligent Vibhishana replied to Raghunathji, the jewel of the kakutstha clan, thus -॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)