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ramayan 6.61.35: अग्निनन्दन! जाओ, अपनी सारी सेनाओं को युद्ध की व्यूह रचना में खड़ा करो और लंका के द्वारों और मार्गों पर अधिकार करके वहीं डटे रहो॥ 35॥   |   ramayan सर्ग 6.61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.61.35 
गच्छ सैन्यानि सर्वाणि व्यूह्य तिष्ठस्व पावके।
द्वाराण्यादाय लङ्कायाश्चर्याश्चास्याथ संक्रमान्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अग्निनन्दन! जाओ, अपनी सारी सेनाओं को युद्ध की व्यूह रचना में खड़ा करो और लंका के द्वारों और मार्गों पर अधिकार करके वहीं डटे रहो॥ 35॥
 
Agninandan! Go, line up all your armies in battle formation and occupy the gates and highways of Lanka and stay put there. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)