श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.61.31 
स एष निर्गतो वीर: शिबिराद् भीमविक्रम:।
वानरान् भृशसंक्रुद्धो भक्षयन् परिधावति॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यह भयंकर और वीर योद्धा अपने शिविर से बाहर आकर अत्यंत क्रोधित होकर वानरों को खाने के लिए सब दिशाओं में दौड़ रहा है॥31॥
 
This fearsome and valiant warrior has come out of his camp and is extremely enraged and is running in all directions to devour the monkeys.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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