Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.61.2-3: वह पर्वत के समान दिखाई देता था और दैत्यों में सबसे बड़ा था। जैसे पूर्वकाल में भगवान नारायण ने आकाश नापने के लिए कदम बढ़ाए थे, वैसे ही वह भी कदम बढ़ा रहा था। भीगे हुए मेघ के समान श्याम वर्ण वाला कुम्भकर्ण स्वर्ण-कण से सुशोभित था। उसे देखकर वानरों की वह विशाल सेना पुनः बड़े वेग से दौड़ने लगी॥2-3॥ | ramayan सर्ग 6.61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह पर्वत के समान दिखाई देता था और दैत्यों में सबसे बड़ा था। जैसे पूर्वकाल में भगवान नारायण ने आकाश नापने के लिए कदम बढ़ाए थे, वैसे ही वह भी कदम बढ़ा रहा था। भीगे हुए मेघ के समान श्याम वर्ण वाला कुम्भकर्ण स्वर्ण-कण से सुशोभित था। उसे देखकर वानरों की वह विशाल सेना पुनः बड़े वेग से दौड़ने लगी॥2-3॥
He looked like a mountain and was the biggest among the demons. Just as in the past Lord Narayana had taken steps to measure the sky, in the same way he was also taking steps. Kumbhakarna, black like a wet cloud, was adorned with a golden bracelet. Seeing him, that huge army of monkeys again started running with great speed.॥2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥