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श्लोक  6.61.19 
प्रजाभि: सह शक्रश्च ययौ स्थानं स्वयंभुव:।
कुम्भकर्णस्य दौरात्म्यं शशंसुस्ते प्रजापते:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् इन्द्र उन लोगों को साथ लेकर ब्रह्माजी के धाम गए और वहाँ जाकर उन सबने प्रजापति के समक्ष कुंभकर्ण की दुष्टता का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।
 
After that Indra went to Brahmaji's abode with those people. Going there, they all described in detail the wickedness of Kumbhakarna in front of Prajapati.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)