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ramayan 6.61.16: जब राक्षस कुम्भकर्ण बार-बार दहाड़ने लगा, तब उसकी भयंकर सिंहनाद सुनकर लोग भयभीत होकर और भी अधिक भयभीत हो गए॥16॥   |   ramayan सर्ग 6.61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.61.16 
तस्य नानद्यमानस्य कुम्भकर्णस्य रक्षस:।
श्रुत्वा निनादं वित्रस्ता: प्रजा भूयो वितत्रसु:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब राक्षस कुम्भकर्ण बार-बार दहाड़ने लगा, तब उसकी भयंकर सिंहनाद सुनकर लोग भयभीत होकर और भी अधिक भयभीत हो गए॥16॥
 
When the demon Kumbhakarna roared again and again, hearing his fierce lion's roar, the people became frightened and even more frightened. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)