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ramayan 6.61.15: इससे वज्रधारी देवराज इन्द्र क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपने तीखे वज्र से कुम्भकर्ण को घायल कर दिया। इन्द्र के वज्र से आहत होकर वह महाबली दैत्य व्याकुल हो उठा और क्रोधपूर्वक जोर-जोर से गर्जना करने लगा॥15॥   |   ramayan सर्ग 6.61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.61.15 
स कुम्भकर्णं कुपितो महेन्द्रो
जघान वज्रेण शितेन वज्री।
स शक्रवज्राभिहतो महात्मा
चचाल कोपाच्च भृशं ननाद॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इससे वज्रधारी देवराज इन्द्र क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपने तीखे वज्र से कुम्भकर्ण को घायल कर दिया। इन्द्र के वज्र से आहत होकर वह महाबली दैत्य व्याकुल हो उठा और क्रोधपूर्वक जोर-जोर से गर्जना करने लगा॥15॥
 
‘This enraged the thunderbolt-wielding Devraj Indra and he wounded Kumbhakarna with his sharp thunderbolt. This gigantic demon was agitated after being struck by Indra's thunderbolt and began roaring loudly in anger.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)