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श्लोक  6.61.13 
बालेन जातमात्रेण क्षुधार्तेन महात्मना।
भक्षितानि सहस्राणि प्रजानां सुबहून्यपि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस विशालकाय राक्षस ने जन्म के समय ही बचपन में भूख से व्याकुल होकर हजारों लोगों को खा लिया था।
 
This gigantic demon, at the very moment of his birth, being afflicted with hunger in his childhood, had devoured thousands of people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)