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ramayan 6.61.12: कुंभकर्ण स्वभाव से ही तेजस्वी और अत्यंत शक्तिशाली है। अन्य राक्षस राजाओं में जो बल है, वह वरदानों के कारण है॥12॥   |   ramayan सर्ग 6.61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.61.12 
प्रकृत्या ह्येष तेजस्वी कुम्भकर्णो महाबल:।
अन्येषां राक्षसेन्द्राणां वरदानकृतं बलम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कुंभकर्ण स्वभाव से ही तेजस्वी और अत्यंत शक्तिशाली है। अन्य राक्षस राजाओं में जो बल है, वह वरदानों के कारण है॥12॥
 
Kumbhakarana is naturally radiant and extremely powerful. The strength that other demon kings have is due to boons.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)