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ramayan 6.61.1: तत्पश्चात्, बल और पराक्रम से युक्त, महातेजस्वी श्री रामजी ने हाथ में धनुष लिए हुए, मुकुट पहने हुए महादैत्य कुम्भकर्ण को देखा॥1॥   |   ramayan सर्ग 6.61: विभीषण का श्रीराम को कुम्भकर्ण का परिचय देना, श्रीराम की आज्ञा से वानरों का लङ्का के द्वारों पर डट जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.61.1 
ततो रामो महातेजा धनुरादाय वीर्यवान्।
किरीटिनं महाकायं कुम्भकर्णं ददर्श ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, बल और पराक्रम से युक्त, महातेजस्वी श्री रामजी ने हाथ में धनुष लिए हुए, मुकुट पहने हुए महादैत्य कुम्भकर्ण को देखा॥1॥
 
Thereafter, with a bow in his hand, the great and brilliant Shri Ram, full of strength and power, saw the great demon Kumbhakarna wearing a crown. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)