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ramayan 6.60.91: उसने बड़े हर्ष और प्रसन्नता से अपना मुख धोया और स्नान किया और पीने की इच्छा से तुरन्त ही बलवर्धक पेय मँगवाया ॥ 91॥   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  6.60.91 
प्रक्षाल्य वदनं हृष्ट: स्नात: परमहर्षित:।
पिपासुस्त्वरयामास पानं बलसमीरणम्॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
उसने बड़े हर्ष और प्रसन्नता से अपना मुख धोया और स्नान किया और पीने की इच्छा से तुरन्त ही बलवर्धक पेय मँगवाया ॥ 91॥
 
He washed his face and bathed with great joy and delight and, desiring to drink, immediately ordered for a strength-enhancing drink to be brought.॥ 91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)