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ramayan 6.60.88: तब 'जैसी आपकी इच्छा' ऐसा कहकर रावण द्वारा भेजे हुए वे सभी राक्षस कुम्भकर्ण के पास लौटकर इस प्रकार बोले -   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  6.60.88 
तथेत्युक्त्वा तु ते सर्वे पुनरागम्य राक्षसा:।
कुम्भकर्णमिदं वाक्यमूचू रावणचोदिता:॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
तब 'जैसी आपकी इच्छा' ऐसा कहकर रावण द्वारा भेजे हुए वे सभी राक्षस कुम्भकर्ण के पास लौटकर इस प्रकार बोले -
 
Then saying 'as you wish' all those demons sent by Ravana came back to Kumbhakarna and spoke thus -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)