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ramayan 6.60.87: तब रावण ने वहाँ उपस्थित राक्षसों से बड़े हर्ष के साथ कहा - 'मैं यहाँ कुम्भकर्ण का दर्शन करना चाहता हूँ; उसका यथोचित स्वागत किया जाना चाहिए।' ॥87॥   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  6.60.87 
रावणस्त्वब्रवीद‍्धृष्टो राक्षसांस्तानुपस्थितान्।
द्रष्टुमेनमिहेच्छामि यथान्यायं च पूज्यताम्॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
तब रावण ने वहाँ उपस्थित राक्षसों से बड़े हर्ष के साथ कहा - 'मैं यहाँ कुम्भकर्ण का दर्शन करना चाहता हूँ; उसका यथोचित स्वागत किया जाना चाहिए।' ॥87॥
 
Then Ravana said to the demons present there with great joy, 'I want to see Kumbhakarna here; he should be accorded a fitting welcome.' ॥ 87॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)