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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  6.60.86 
कुम्भकर्ण: प्रबुद्धोऽसौ भ्राता ते राक्षसेश्वर।
कथं तत्रैव निर्यातु द्रक्ष्यसे तमिहागतम्॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यराज! आपका भाई कुंभकर्ण जाग गया है। बताइए, उसे क्या करना चाहिए? क्या उसे सीधे युद्धभूमि में आना चाहिए या आप उसे यहीं उपस्थित देखना चाहते हैं?॥ 86॥
 
O lord of demons! Your brother Kumbhakarna has woken up. Tell me, what should he do? Should he come straight to the battlefield or do you want to see him present here?॥ 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)