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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  6.60.84 
सुप्तमुत्थाप्य भीमाक्षं भीमरूपपराक्रमम्।
राक्षसास्त्वरिता जग्मुर्दशग्रीवनिवेशनम्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सोये हुए, भयानक नेत्रों वाले, सुन्दर और पराक्रमी कुम्भकर्ण का हरण करके वे राक्षस शीघ्रतापूर्वक दस सिर वाले रावण के महल में गये।
 
Having thus abducted Kumbhakarna, who was asleep and had terrible eyes, beauty and valour, those demons quickly went to the palace of the ten-headed Ravana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)