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ramayan 6.60.64: तब यह जानकर कि वह संतुष्ट हो गया है, राक्षस उसके सामने कूद पड़े, उसके प्रति सम्मान में अपने सिर झुकाए और उसके चारों ओर खड़े हो गए।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  6.60.64 
ततस्तृप्त इति ज्ञात्वा समुत्पेतुर्निशाचरा:।
शिरोभिश्च प्रणम्यैनं सर्वत: पर्यवारयन्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
तब यह जानकर कि वह संतुष्ट हो गया है, राक्षस उसके सामने कूद पड़े, उसके प्रति सम्मान में अपने सिर झुकाए और उसके चारों ओर खड़े हो गए।
 
Then knowing that he was satisfied, the demons leapt before him, bowed their heads in respect to him and stood around him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)