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स जृम्भमाणोऽतिबल: प्रबुद्धस्तु निशाचर:।
नि:श्वासश्चास्य संजज्ञे पर्वतादिव मारुत:॥ ५९॥
अनुवाद
इस प्रकार जम्हाई लेते हुए जब वह अत्यंत शक्तिशाली रात्रि प्राणी जागा, तो उसके मुख से निकलने वाली श्वास ऐसी प्रतीत हुई, मानो पर्वत से हवा बह रही हो।
Yawning in this manner, when that extremely powerful night creature woke up, the breath that came out of his mouth seemed like the wind blowing from a mountain.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥